वाराणसी: अंतरराज्यीय साइबर म्यूल अकाउंट गैंग का पर्दाफाश, 5 शातिर गिरफ्तार, 15 मोबाइल और 2 लग्जरी कार बरामद
विदेशी साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराते थे गिरोह के सदस्य। खाताधारकों को लालच देकर खुलवाए जाते थे म्यूल अकाउंट, ट्रांजेक्शन APK से करते थे ठगी
INDIA NEWS REPORT
वाराणसी। श्रीमान पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी श्री मोहित अग्रवाल के निर्देशन में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना साइबर क्राइम की पुलिस टीम ने एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर, ट्रांजेक्शन APK फाइल और म्यूल अकाउंट गैंग का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में गैंग के 05 शातिर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस उपायुक्त अपराध नीतू कादयान, अपर पुलिस उपायुक्त अपराध नृपेन्द्र और सहायक पुलिस आयुक्त अपराध विनय द्विवेदी के पर्यवेक्षण में हुई इस कार्रवाई में आरोपियों के पास से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है।
बरामदगी का विवरण
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से निम्न सामान बरामद किया: -
- 15 अदद एंड्रायड मोबाइल फोन
- 03 अदद आईफोन
- 43 अदद एटीएम कार्ड
- 12 अदद पासबुक -
- 08 अदद चेकबुक
- 11 अदद क्यूआर कोड
- 12 अदद सिम कार्ड
- 01 अदद लैपटॉप
- 01 अदद डायरी
- नकदी: 12,060 रुपये
- 02 चार पहिया वाहन: महिन्द्रा थार UP 65 FV 0326 और हुंडई आई-20 UP 65 EA 2803
ऐसे करते थे अपराध Modus Operandi
पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह देशभर में सक्रिय साइबर अपराधियों और विदेशी साइबर ठगों को "म्यूल बैंक खाते" उपलब्ध कराने का काम करता था।
गिरोह के सदस्य आर्थिक रूप से कमजोर और भोले-भाले लोगों को मोटे कमीशन का लालच देकर उनके नाम से विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाते थे। इसके बाद खाताधारकों से ATM कार्ड, पासबुक, चेकबुक, सिम कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग ID और पासवर्ड लेकर खातों पर पूरा नियंत्रण कर लेते थे।
विदेशी साथियों से मिली ट्रांजेक्शन APK फाइल को खाते से लिंक मोबाइल में इंस्टॉल कराकर बैंक खातों को रिमोट एक्सेस दिया जाता था।
साइबर ठगी से आई रकम पहले इन म्यूल खातों में मंगाई जाती, फिर उसे कई स्तरों पर अन्य खातों में ट्रांसफर कर ठगी को अंजाम दिया जाता था।
कमीशन पर चलता था पूरा खेल
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि साइबर ठगी की रकम पर उन्हें 08% से 15% तक कमीशन मिलता था। इसी अवैध कमाई से उन्होंने महिन्द्रा थार और हुंडई आई-20 कारें खरीदी थीं और उनकी EMI भी इसी पैसे से भरी जा रही थी।
आरोपियों के मोबाइल और लैपटॉप से बैंक खातों, संदिग्ध चैट, टेलीग्राम कम्युनिकेशन और साइबर लेन-देन के डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। इन्हें वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा जा रहा है।
गिरफ्तार अभियुक्त
- आदर्श चौबे पुत्र मिथिलेश चौबे, निवासी रामगढ़, चुनार, मिर्जापुर। हाल पता: वरुणा इन्क्लेव, कैंट, वाराणसी
- आशीष यादव पुत्र ओमकार यादव, निवासी तोफापुर बिन्दवल, बिलरियागंज, आजमगढ़। हाल पता: वरुणा इन्क्लेव, कैंट, वाराणसी
- . सुजल सिंह पुत्र विजय सिंह, निवासी कवाल, जनसठ, मुजफ्फरनगर। हाल पता: गणपति इन्क्लेव, सुंदरपुर, वाराणसी
- पियूष सिंह पुत्र रामकुवर सिंह, निवासी भीखमपुर, घोसी, मऊ। हाल पता: कबीर नगर, भेलूपुर, वाराणसी
- युवराज वर्मा पुत्र आशीष वर्मा, निवासी गांधी नगर, नरिया, लंका, वाराणसी कानूनी कार्रवाई
आरोपियों के खिलाफ थाना साइबर क्राइम में मु0अ0सं0 35/2026 धारा 318(4), 61(2), 112 BNS व धारा 66C, 66D IT एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है। अन्य आपराधिक इतिहास की भी जानकारी की जा रही है।
गिरफ्तार करने वाली टीम में प्रभारी निरीक्षक उदयवीर सिंह, निरीक्षक योगेन्द्र प्रसाद, उ0नि0 आलोक सिंह यादव, अभिषेक पाण्डेय, शैलेन्द्र कुमार, विवेक सिंह सहित साइबर क्राइम की पूरी टीम शामिल रही। पुलिस की अपील
साइबर क्राइम पुलिस ने आमजन से अपील की है: - किसी को अपना बैंक खाता, ATM, पासबुक, सिम या इंटरनेट बैंकिंग डिटेल न दें - कमीशन के बदले खाता खुलवाने/उपयोग करने के प्रस्ताव से सतर्क रहें - अज्ञात APK फाइल या SMS फॉरवर्डर ऐप इंस्टॉल न करें - साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं
इस गिरोह के भंडाफोड़ से साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क पर वाराणसी पुलिस ने बड़ी चोट की है।
देखे "मैडम सर" आइपीएस (डीसीपी क्राइम ) नीतू कादयान की बाईट- https://tinyurl.com/4rjuz6zk


