PoK में मानवाधिकार उल्लंघन पर वाराणसी के अधिवक्ता की बड़ी पहल
शशांक शेखर त्रिपाठी की केंद्र सरकार और NHRC से प्रभावी कार्रवाई की मांग
INDIA NEWS REPORT
DESK
वाराणसी, 1 अगस्त 2026 पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में नागरिकों पर हो रहे कथित अत्याचार और मानवाधिकार उल्लंघन के मुद्दे को लेकर वाराणसी के वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का ध्यान खींचा है।
त्रिपाठी, जो भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक और दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी हैं, ने केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय विदेश मंत्री और NHRC को विस्तृत पत्र भेजकर इस मामले में कूटनीतिक और संवैधानिक पहल करने की मांग की है।
पत्र में क्या कहा गया
1. संसद के 1994 के प्रस्ताव का हवाला
त्रिपाठी ने अपने पत्र में कहा कि वर्ष 1994 में भारतीय संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर PoK को भारत का अभिन्न अंग घोषित किया था। ऐसे में वहां नागरिकों के अधिकारों का हन केवल अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की संवैधानिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी भी है।
2. केंद्र से अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुद्दा उठाने की मांग
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तथ्यों के साथ मजबूती से उठाया जाए। साथ ही गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय संयुक्त रणनीति बनाकर समय-समय पर देश को की गई कार्रवाई से अवगत कराएं।
3.NHRC से एक्शन टेकन रिपोर्ट की मांग
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से अनुरोध किया गया है कि वह प्रकरण का संज्ञान ले और भारत सरकार से विस्तृत कार्यवाही प्रतिवेदन मांगे। आवश्यकता पड़ने पर आयोग सरकार को PoK में रह रहे लोगों के मानवाधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक, कूटनीतिक और विधिक उपायों के उपयोग की अनुशंसा भी करे।
"राष्ट्रीय हित में जरूरी कदम"
शशांक शेखर त्रिपाठी ने विश्वास जताया कि भारत सरकार और NHRC राष्ट्रीय हित, संवैधानिक दायित्वों और मानवाधिकार संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर गंभीरता से विचार करेंगे और आवश्यक कदम उठाएंगे।
इस पहल को काशी के विधि जगत में PoK के मुद्दे पर नागरिक समाज की सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है।


