वाराणसी से करीब 500 किमी दूर है, जहां काशी विश्वनाथ बाबा विराजमान हैं

राज्य के देवघर में स्थित बाबा धाम, जिसे वैद्यनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है. यहां मौजूद ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से नौवां ज्योतिर्लिंग है. यह स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच काफी प्रसिद्ध है:शिव विशाल गुप्ता विशेष संवाददाता

वाराणसी से करीब 500 किमी दूर है, जहां काशी विश्वनाथ बाबा विराजमान हैं
देवघर स्थित बाबा धाम

INDIA NEWS REPORT

शिव विशाल गुप्ता

झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता यहां के पर्यटन में अहम भूमिका निभाती है. पर झारखंड में मौजूद प्राचीन मंदिर भी बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इन प्राचीन मंदिरों का वैभव और इतिहास पर्यटकों के बीच प्रचलित है।

राज्य के देवघर में स्थित बाबा धाम, जिसे वैद्यनाथ धाम के नाम से भी जाना जाता है. यहां मौजूद ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से नौवां ज्योतिर्लिंग है. यह स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच काफी प्रसिद्ध है. अगर आप भी झारखंड आने का प्लान बना रहे हैं, तो बाबा धाम है आपके लिए खास. यह ज्योर्तिलिंग वाराणसी से करीब 500 किमी दूर है, जहां काशी विश्वनाथ बाबा विराजमान हैं।

कैसे आएं बाबा धाम

रांची से करीब 248 किलोमीटर दूर देवघर में स्थित है-बाबाधाम मंदिर. बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव का पवित्र स्थान है. यहां हर वर्ष हजारों भक्त भगवान भोले पर जल चढ़ाने आते हैं. यह मंदिर भारत के प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक है. यहां शक्तिपीठ भी मौजूद है. यह मंदिर आध्यात्म का केंद्र है।

क्या है मंदिर की खासियत

बाबा बैद्यनाथ धाम झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है. यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां शिव और शक्ति एक साथ विराजमान है. बाबा बैद्यनाथ धाम में भगवान भोलेनाथ के ज्योतिर्लिंग के साथ,माता सती का शक्तिपीठ भी मौजूद है. यहां माता सती का हृदय गिरा था. यही कारण है, इस जगह को शिव शक्ति का मिलन स्थान भी कहा जाता है. यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना जरुर पूरी होती है. इस कारण यहां स्थापित शिवलिंग को कामना लिंग भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान विष्णु ने की थी.सावन के समय मंदिर का महत्व अधिक बढ़ जाता है. लोग दूर-दूर से कावड़ यात्रा कर आते हैं और यहां शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं. सावन के अतिरिक्त भी इस मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है. यहां महादेव के अन्य मंदिरों से उलट,मंदिर के शीर्ष पर त्रिशूल की जगह पंचशूल लगा हुआ है।