बिजली के निजीकरण का देशव्यापी सांकेतिक जबरदस्त विरोध,हड़ताल

बिजली निजीकरण पर सुलग उठा बनारस , बनारस के हजारो अभियंता, अवर अभियंता, नियमित, संविदा के साथ महिलाकर्मियो ने किया बिजली के निजीकरण और बिजली के दर बढाने का खुला विरोध ! हड़ताल में शामिल हुए 25 करोड़ अधिकारी ,कर्मचारी एवं किसान, पूरे देश में गरजा विरोध का बिजली करंट! :जयचन्द की रिपोर्ट

बिजली के निजीकरण का देशव्यापी सांकेतिक जबरदस्त विरोध,हड़ताल
बिजली के निजीकरण का देशव्यापी सांकेतिक जबरदस्त विरोध,हड़ताल
बिजली के निजीकरण का देशव्यापी सांकेतिक जबरदस्त विरोध,हड़ताल

INDIA NEWS REPORT वाराणसी:जयचन्द वाराणासी-9जुलाई। विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष उ0प्र0 के बैनर तले आज बनारस के हजारो अभियंता, अवर अभियंता, नियमित एवं संविदाकर्मियों के साथ महिलाकर्मियो ने बिजली के निजीकरण एवं बिजली के दर बढ़ाने का भिखारीपुर स्थित प्रबन्ध निदेशक कार्यालय पर किया खुला जबरदस्त विरोध ।

      वक्ताओ ने बताया कि "बिजली बिकेगी नहीं, संघर्ष झुकेगा नहीं!"यही नारा लेकर आज पीएम मोदी के बनारस की सड़कों पर उतरे बिजली कर्मचारी, जब उन्होंने देशव्यापी एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल में भाग लिया। बिजली के निजीकरण के खिलाफ यह विरोध अब सिर्फ एक विभाग की आवाज़ नहीं रह गया, बल्कि यह एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसमें 25 करोड़ से अधिक अधिकारी और कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

         वक्ताओ ने बताया कि बनारस समेत पूरे पूर्वांचल में बिजलीकर्मियों का प्रदर्शन आज चरम पर दिखा। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के नेतृत्व में चल रहे इस विरोध में रेलवे, बैंक, एलआईसी, संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य केंद्रीय संगठनों ने भी समर्थन दिया है। बनारस के पावर हाउस, वितरण खंड कार्यालयों और बिजली स्टेशनों से विरत होकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों का जमावड़ा पूरे दिन भिखारीपुर में जारी रहा।

वक्ताओ ने बताया कि आज के विरोध प्रदर्शन के दौरान हाथों में तख्तियां, नारों में ललकार और चेहरों पर चेतावनी दिखाते हुये अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने कहा कि सरकार ने यदि निजीकरण वापस नहीं लिया, तो यह चेतावनी आगे चलकर निर्णायक संघर्ष में बदलेगी।बिजली कर्मचारीयो ने कहा कि "हमने बिना निजी कंपनियों के भी रोशन किया है उत्तर प्रदेश, अब हमारे हाथ बांधने की साज़िश क्यों?"

वक्ताओ ने विज्ञापन की विसंगतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार 2012 से 2024 तक की उपलब्धियों की गिनती गिना रही है, वही दूसरी तरफ उसी व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि "अगर व्यवस्था इतनी सुधरी है तो निजी कंपनियों की ज़रूरत क्यों?"

वक्ताओ ने बताया कि आज धरना स्थल पर गूंजते रहे नारे— 'निजीकरण वापस लो', 'जनता की बिजली जनता को दो', 'मुख्यमंत्री संवाद करो','बिजली का निजीकरण बन्द करो', 'जनता को सस्ती बिजली दो',।

वक्ताओ ने बताया कि किसान,आमजनमानस, एवं अधिकारी/कर्मचारि का कहना है कि निजीकरण से आम जनता को महंगी बिजली मिलेगी, ग्रामीण इलाकों में सेवाएं घटेंगी और हजारों कर्मियों एवं तैयारी में लगे लाखो विद्यार्थियों जो आई0टी0आई0 ,डिप्लोमा,बी0टेक आदि की पढ़ाई कर रहे की रोज़ी-रोटी पर खतरा मंडराएगा।

संघर्ष समिति ने ऐलान किया है कि यदि सरकार अब भी नहीं चेती, तो बिजली संकट गहराना तय है आज के देशव्यापी प्रदर्शन में यह साफ हो गया कि यह लड़ाई सिर्फ बिजली की नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और जनहित की भी है। बनारस के बिजली कर्मचारियों ने देशभर की आवाज़ को जोड़ते हुए सरकार को अंतिम चेतावनी दे दी— "जनता की बिजली, जनता के पास रहनी चाहिए... नहीं तो अब बत्ती गुल होगी, और आंदोलन तेज़ होगा!" इस आंदोलन की लहर अब सिर्फ तारों में नहीं, दिलों में दौड़ रही है। अब देखना ये होगा कि सरकार ‘स्विच ऑन’ करती है संवाद का, या फिर ‘पावर ऑफ’ हो जाएगा भरोसे का!

सभा की अध्यक्षता ई0 पंकज जैसवाल ने एवं संचालन सौरभ श्रीवास्तव ने किया।

सभा को सर्वश्री ई0 मायाशंकर तिवारी,ई0 अनिल कुमार,ई0 रामाशीष ,राजेश सिंह,विजय नारायण हिटलर, सौरभ श्रीवास्तव,अंकुर पाण्डेय,संदीप कुमार, रविन्द्र यादव , दीपक गुप्ता,रंजीत पटेल, जयप्रकाश, मो0 हारिश,मदन श्रीवास्तव, उदयभान दुबे,चंदन विश्वकर्मा, गजेंद्र श्रीवास्तव,आदि ने संबोधित किया।

उक्त जानकारी अंकुर पाण्डेय-मीडिया सचिव/प्रभारी विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0,वाराणासी ने दिया।

https://youtube.com/shorts/oUO-Dqbj_XM?si=DKQvWnqm1gyZ7ByM