"लोकतंत्र की रक्षा के लिए कानून सर्वोपरि, संसद की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं" – अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी
वाराणसी के अधिवक्ता की अपील - संवैधानिक मर्यादा में रहकर करें विरोध
INDIA NEWS REPORT
वाराणसी, 21 जुलाई 2026 दिल्ली में संसद की ओर किए गए मार्च और उसके बाद बनी कानून-व्यवस्था की स्थिति पर वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र हर नागरिक को शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है, लेकिन किसी भी संगठन को कानून की अवहेलना कर अति-संवेदनशील क्षेत्रों की ओर बढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
श्री त्रिपाठी ने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन को प्रशासन की अनुमति नहीं है और फिर भी संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान की ओर बढ़ने का प्रयास किया जाए, खासकर संसद सत्र के दौरान, तो यह केवल विरोध नहीं रह जाता। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का गंभीर सवाल बन जाता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कानून के अनुसार आवश्यक और न्यूनतम बल का प्रयोग करना वैधानिक और जरूरी कदम है। "लोकतंत्र का मतलब अराजकता या संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाना नहीं है। संसद 140 करोड़ भारतीयों की आस्था का प्रतीक है, जिसकी सुरक्षा हर नागरिक और राज्य की जिम्मेदारी है," उन्होंने कहा।
अधिवक्ता त्रिपाठी ने सभी राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों से अपील की कि वे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग संविधान और कानून की मर्यादा में रहकर करें। उन्होंने कहा कि हिंसा, उग्र प्रदर्शन, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
अंत में उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत संविधान, कानून के शासन और शांतिपूर्ण संवाद में है। "किसी भी परिस्थिति में कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता। लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।"


