सरकार के लिए मुसीबत छोड़कर गए धर्मेन्द्र प्रधान!! क्या मजबूरी में देना पड़ा इस्तीफा?
कहता है कबूतर 'कोई तो है चक्कर'! NEET पेपर लीक पर विपक्ष और छात्रों के दबाव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने PM मोदी को भेजा इस्तीफा, संघ और भाजपा नेताओं के बयान के बाद बदला फैसला
INDIA NEWS REPORT
क्या मजबूरी में देना पड़ा इस्तीफा या कुछ और!? "कहता है कबूतर कोई तो है चक्कर" तीसरे दौर की बातचीत के पहले ही इस्तीफा?
सरकार के लिए मुसीबत खड़ी करके चले गए धर्मेन्द्र प्रधान!!
आखिरकार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देने के लिए विवश होना पड़ा।
कॉकरोच जनता पार्टी और केंद्र सरकार के बीच दोपहर को होने वाली तीसरे दौर की बातचीत शुरू होने से कुछ देर पहले ही धर्मेन्द्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया।
इस्तीफे की वजह और पृष्ठभूमि
अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि "मैं देश के युवाओं, उनकी आकांक्षाओं और भावनाओं का बहुत सम्मान करता हूँ।"
इससे कुछ घंटे पहले ही कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सुबह कहा था कि अगर सरकार से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, तो सरकार से बातचीत जारी रखने का कोई मतलब नहीं है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार के साथ दूसरे दौर की बातचीत के बाद दावा किया था कि नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को उचित मुआवजा देने और प्रदर्शनकारी छात्रों के विरुद्ध कोई मुकदमा दर्ज न करने की उनकी मांग सरकार ने सैद्धान्तिक रूप से मान ली है।
साथ ही पार्टी ने चेतावनी भी दी थी कि नीट पेपर लीक मामले में यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हुआ, तो देश भर में इस आंदोलन का और बड़े रूप में विस्तार किया जाएगा।
संसद से सड़क तक हंगामा
यहाँ यह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की थी कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा नहीं हो जाता, तब तक वह संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार नहीं होगी।
कांग्रेस सहित समूचा विपक्ष धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद के मानसून सत्र में लगातार हंगामा कर रहा था, जिसके कारण संसद की कार्यवाही नहीं चल पा रही थी।
जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक ने जिस अनशन की शुरुआत की थी, उसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग प्रमुख थी। हालांकि सोनम वांगचुक ने दो दिन पहले जब अपना अनशन समाप्त किया, तो उन्होंने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विशेष जोर नहीं दिया।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित 100 से अधिक वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे सहित अन्य मांगों को लेकर प्रधानमंत्री आवास के समीप धरना देकर गिरफ्तारी दी। इसके बाद देश भर में यह आंदोलन व्यापक रूप से फैलता गया और आंदोलनकारियों की एकमात्र मांग यही रही कि धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा दें।
सरकार के तमाम प्रयास नाकाम
आंदोलनकारी छात्रों के आक्रोश को शांत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई कदम उठाए। उन्होंने फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन और पेपर लीक रोकने के लिए इसी सत्र में एक बिल लाने की घोषणा की। रात में छात्रों को संबोधित किया और लगातार दो दिन इंस्टाग्राम पर संदेश भी दिए।
परंतु ये सारे कदम भी छात्रों को धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं कर सके।
कुल मिलाकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सरकार धर्मेन्द्र प्रधान को शिक्षा मंत्री पद पर कायम रखने के लिए अडिग है। इसके पीछे एकमात्र कारण यही माना जा रहा था कि सरकार यह संदेश नहीं देना चाहती थी कि यदि विपक्ष और आंदोलनकारी छात्रों की मांग मानकर धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफा लिया गया, तो भविष्य में किसी भी मंत्री के इस्तीफे के लिए आंदोलनों का एक नया सिलसिला शुरू हो सकता है।
अचानक बदला फैसला, क्यों?
लेकिन अब सरकार को इस हकीकत को स्वीकार करना पड़ेगा कि नीट पेपर लीक का मामला सामने आते ही नैतिकता के आधार पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे की घोषणा करके धर्मेन्द्र प्रधान अपना कद बढ़ा सकते थे। परंतु इतना सब होने के बाद मजबूरी में इस्तीफे की घोषणा करके उन्होंने पूरी सरकार को असहज स्थिति में पहुंचा दिया है।
इतनी किरकिरी होने के बाद भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा न देने की जिद पर अड़े धर्मेन्द्र प्रधान आखिर अचानक अपना फैसला बदलने के लिए विवश क्यों हुए? इसे समझने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के उस भाषण पर गौर करना जरूरी है जो उन्होंने एक दिन पहले नई दिल्ली में आयोजित विश्व मांगल्य सभा के एक महत्वपूर्ण समारोह में दिया था।
अपने इस भाषण में संघ प्रमुख ने कहा था कि नई पीढ़ी को अपनापन और समय देने एवं उसके साथ संवाद करने की आवश्यकता है। भागवत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नई पीढ़ी के साथ संवाद करके ही उन्हें सही दिशा दिखाई जा सकती है।
गौरतलब है कि भागवत के इस संबोधन से दो दिन पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता और अतीत में मानव संसाधन मंत्री रह चुके डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने भी छात्रों के संसद मार्च के बाद कहा था कि परीक्षा प्रणाली को लेकर छात्रों की चिंताएं और सरोकार वास्तविक हैं। उन्होंने संसद मार्च में शामिलों पर बलप्रयोग को 'निर्मम' बताते हुए यहां तक कह दिया था कि बल का ऐसा इस्तेमाल भारतीय समाज के एक बड़े हिस्से को 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य से दूर कर देगा।
इन दोनों बयानों के बाद ही राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई थीं और अंततः धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।


