"वंदे मातरम्" प्रकरण: शशांक शेखर त्रिपाठी की निष्पक्ष जांच की मांग पर राष्ट्रपति सचिवालय ने लिया संज्ञान, शिकायत गृह सचिव को अग्रेषित

15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में "वंदे मातरम्" के दौरान व्यवधान का आरोप, वीडियो वायरल, अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने 16 अगस्त को राष्ट्रपति सचिवालय को भेजा था प्रार्थना-पत्र

"वंदे मातरम्" प्रकरण: शशांक शेखर त्रिपाठी की निष्पक्ष जांच की मांग पर राष्ट्रपति सचिवालय ने लिया संज्ञान, शिकायत गृह सचिव को अग्रेषित

INDIA NEWS REPORT

 कुलदीप बरनवाल नई दिल्ली/वाराणसी, 24 अगस्त 2026 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान "वंदे मातरम्" गायन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। वीडियो में कथित तौर पर व्यवधान के आरोपों को लेकर अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी द्वारा उठाई गई निष्पक्ष जांच की मांग पर राष्ट्रपति सचिवालय ने कार्रवाई की है।

अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने 16 अगस्त 2026 को महामहिम राष्ट्रपति को ई-मेल के माध्यम से विस्तृत प्रार्थना-पत्र भेजा था। अपने पत्र में उन्होंने किसी को भी पहले से दोषी ठहराने के बजाय घटना की निष्पक्ष, स्वतंत्र और वैज्ञानिक जांच की मांग की थी। उन्होंने वीडियो सहित सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, मूल वीडियो-ऑडियो, CCTV फुटेज, raw footage, metadata तथा अन्य स्वतंत्र रिकॉर्डिंग के संरक्षण और आवश्यकता पड़ने पर FSL/साइबर फॉरेंसिक जांच कराने का अनुरोध किया था।

इस शिकायत पर 24 अगस्त 2026 को प्रातः 11:29 बजे राष्ट्रपति सचिवालय के अवर सचिव कुलचंद्र कुमार ने संज्ञान लेते हुए उक्त प्रार्थना-पत्र को गृह मंत्रालय में सचिव गोविंद मोहन (hshso@nic.in) को उचित ध्यानार्थ प्रेषित कर दिया है। ई-मेल में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि की गई कार्रवाई की सूचना सीधे याचिकाकर्ता को दी जाए।

प्रार्थना-पत्र में यह भी मांग की गई है कि घटना की तारीख को लागू विधिक प्रावधानों की स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि जांच में प्रथमदृष्टया अपराध बनता है तो कानून के अनुसार FIR एवं अन्य विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही संबंधित व्यक्तियों, आयोजकों, प्रत्यक्षदर्शियों और recording personnel के बयान दर्ज करने की भी मांग की गई है।

इस संबंध में शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि यह शिकायत किसी राजनीतिक व्यक्ति को दोषी घोषित करने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीक के सम्मान और Rule of Law की कसौटी पर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए है। उन्होंने कहा कि यदि आरोप गलत हैं तो जांच से संबंधित व्यक्तियों को राहत मिलेगी और यदि आरोप सही सिद्ध होते हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए - यही इस शिकायत का मूल उद्देश्य है।