वाराणसी शासन,प्रशासन,व ज्युडिशियल जेल मैनुअल के आदेश,निर्देश को ठेंगे पे!!!!
वाराणसी कारागार अपने मैनुअल से चलाता यह अधीक्षक उमेश सिंह ;प्रह्लाद की खास रिपोर्ट
INDIA NEWS REPORT
प्रह्लाद गुट की खास रिपोर्ट
शासन,प्रशासन,व ज्युडिशियल जेल मैनुअल के आदेश,निर्देश को ठेंगे पे रखकर,कारागार अपने मैनुअल से चलाता यह अधीक्षक उमेश सिंह
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र जिला कारागार वाराणसी के अंदर अपराधियों से सुविधा शुल्क लेकर दी जाती है।सारी सुविधा की खुली पोल कैमरे में कैद है।
जिला कारागार के अंदर का वीडियो कैसे आया सामने क्या कोई बतायेगा यह कैसी सुरक्षा इन 5 सालों में अधीक्षक के खिलाफ कितनी शिकायते किसका है इनपर हाथ एक तरफ उत्तर प्रदेश की सरकार अपराधीयों के खिलाफ अभियान चलाकर अपराधियों को मिट्टी में मिलाने की हिदायत देती है।तो वही प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जिला कारागार अधीक्षक आचार्य डॉक्टर उमेश सिंह द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश को ताख पर रखकर अपराधियों को जेल में सुविधा शुल्क लेकर पूरी तरह से भरपूर तमाम सुविधाये दिया जाता है।साथ ही
नशाखोरी का सामग्री सहित अन्य अवैध समान खाने पीने का बेचवाया जाता है। सूत्र बताते है कि अंदर *मोबाइल* तक चलता है।जिसका प्रमाण यह है कि जेल के अंदर बन्द बन्दियों से *नशाख़ोरी* का सामान बेचवाया जा रहा है।कैमरे में कैद है। आखिर कौन बनाया यह वीडिय? और अंदर तक *मोबाइल* पहुंच कैसे गया सुरक्षा की दृष्टि से यह बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है।
बीते दिनों जेल के अंदर के हकीकत की इस वीडियो को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के समक्ष वायरल किया गया जिसमे एक अधिवक्ता शैलेन्द्र पाण्डेय कवि द्वारा जिला कारागार वाराणसी के अंदर जो हो रहे काले कारनामो का काला चिट्ठा खोल के रख दिया लगता है जेल के अंदर लगे सीसीटीवी फुटेज की जाँच हो जाये तो दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा।जेल के अंदर जाने के लिये भारी तलाशी की जाती है।कौन मिली भगत है इसपर भी सवाल खड़े किये जा सकते है।और यहाँ तक कि कपड़े भी उतरवाकर तलाशी कराया जाता है।उसके बाद भी *अंदर कैसे पहुंच गया कैमरा* और कौन खोल दिया जिला कारागार का पोल यह भी एक जाँच का विषय है।वही पूर्व में भी *जेलर व महिला डिप्टी जेलर रत्न प्रिया* सहित जेल से छूटे बन्दियों द्वारा अधीक्षक के खिलाफ शिकायत आलाधिकारियों से किया गया लेकिन कार्यवाही के नाम पर सब गोलमाल निकला इन 5 सालों में कई जेलों में रह चुके कारागार चलाने वाले *अधीक्षक आचार्य डॉक्टर उमेश सिंह के भ्रस्टाचार व अन्य शिकायतों की भ्रमाण है।* योगी सरकार के यह कैसे अधिकारी है जो जाँच नही कर पाते सारे शिकायत करने वालो को झूठा बनाकर अधीक्षक को बचा दिया जाता है आखिर किसका आशीर्वाद है इस अधीक्षक पर वहीं जेल से छूटे बंदी द्वारा इनके खिलाफ जेल में हो रहे भ्रस्टाचार की शिकायत मुख्यालय कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं से लेकर आलाधिकारियों व माननीय न्यायाधीशों को दिया जाता है तो उसके विरुद्ध जेल अधीक्षक द्वारा बिना शाक्ष्य के रंगदारी का मुकदमा करा दिया जाता है।और जेल *अधीक्षक द्वारा उसे जेल में बुलाकर उसकी हत्या की साजिश तक रची जा रही है।* कौन होगा इसका जिम्मेदार फर्जी मुकदमा लिखने वाली पुलिस विभाग या फर्जी मुकदमा कराने वाला कारागार विभाग यह तो आने वाला वक्त बतायेगा यही अधीक्षक पूर्व मे बाराबंकी में रह चुके जेल अधीक्षक के पद पर तैनात एक मामला सामने आया था इनके द्वारा *नशे में धुत बाराबंकी अधीक्षक कारागार राज्यमंत्री से मिलने पहुंचा जब गुस्साए मंत्री तो उन्हें बदनाम करने की साजिश से 50 हजार रुपये घुस देने लगा तभी मंत्री के साइडो ने केस कराया था* वही मुरादाबाद जेल में रहे यही अधीक्षक के कारनामे उजागर हुये थे कि *इनके सह पर चल रहा था सट्टे का काला कारोबार।* वही वाराणसी में कुछ दिन पूर्व में भी एक अधिवक्ता ने भी भ्रस्टाचार का आरोप इनपर लगाया था *जाँच कम मामला रफादफा ज्यादा किया जाता है।* क्या इतने शिकायत के बावजूद कोई कार्यवाही नही शिकायत करने वाला मंत्री ,जेलर,डिप्टी जेलर,बन्दि सब इनके आगे झूठ बन जाता है।मामले कई है सवाल कई है लेकिन *इनके पीछे आखिर किसका साया है।* उस तक भी पहुंचना जरूरी है।माया का साया या फीर बड़े लोगो का साया खैर मीडिया इसका भी पता लगाने में जुटी है।कि *ज्यूडिशियल कस्टडी* में बन्दियों को रक्खे जिम्मेदार लोगों के बीच इस तरह के कारनामे उजागर होते है।तो समाज मे ज्युडिशियल व्यवस्था शासन प्रशासन की छवि खराब होते नजर आयेगी क्योंकि जेल का मुआयना,निरीक्षण,इन्ही लोगो के द्वारा व छापा भी इन्ही के द्वारा मारा जाता है। जेल में पहुंचने से पहले जेल प्रशासन को पता चल जाता है।कि कौन आ रहा है उसी हिसाब से बैरकों के वफादार राइटरो द्वारा बैरकों में यह आवाज पुकारा जाता है।कि अधिकारी का छापा मराने वाला है।अपने अपने पास से *मोबाइल ,गाँजा,कट्टन, लाइटर ,रुपया,व अवैध समान जमा कर दीजिये* जाने के बाद ले लीजियेगा वरना पकड़े जाने पर उसपर दंडनात्मक कार्यवाही की जायेगी फीर जेल उस दिन एलर्ट हो जाता है।वही एक बात बताते चले आपको की न्यायिक अभिरक्षा में रहने वाले कि देखरेख पर इतना बड़ा सवाल है इससे समाज का विश्वास न्यायालय के प्रति उठ जायेगा इसलिये समय रहते *शासन, प्रशासन,ज्यूडिशियल व्यवस्था* की बदनामी और छवि धूमिल होने से बचाने की कोशिश की जानी चाहिये। इस विषय मे पूर्व डीजीपी ,आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने भी आवाज़ उठाई लेकिन अधीक्षक उमेश सिंह की पहुंच बड़ी लगती है । पेश है आज के हालात


