इलाहाबाद हाईकोर्ट का CAT को निर्देश: पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की अनिवार्य सेवानिवृत्ति मामले में जल्द फैसला करे ट्रिब्यूनल
जस्टिस जसप्रीत सिंह की सिंगल बेंच ने अनुच्छेद 227 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा - "मामले को लंबित रखने से कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा"
INDIA NEWS REPORT
रिपोर्ट :-कुलदीप बरनवाल
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT), लखनऊ बेंच को पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर की अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) को चुनौती देने वाली याचिका पर जल्द फैसला करने का निर्देश दिया है। यह मामला 2021 से CAT में लंबित है।
जस्टिस जसप्रीत सिंह की एकल पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत पूर्व IPS ठाकुर द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश पारित किया।
ठाकुर ने अधिवक्ता डॉ. नूतन ठाकुर और दीपक कुमार के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मार्च 2021 में दी गई अनिवार्य सेवानिवृत्ति को CAT में चुनौती देने वाली अपनी मूल अर्जी के शीघ्र निस्तारण की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान भारत सरकार (UOI) की ओर से पेश अधिवक्ता ने भी कहा कि ट्रिब्यूनल को जल्द फैसला करने का निर्देश देने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि याचिका को हाईकोर्ट में लंबित रखने से कोई लाभ नहीं होगा। कोर्ट ने CAT को निर्देश दिया कि वह लंबित मूल अर्जी (OA) पर पक्षों को सुनवाई का अवसर देकर "जितनी जल्दी हो सके" अंतिम निर्णय ले।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा:
"...उक्त याचिका को लंबित रखने से कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा, बल्कि प्रतिवादी नंबर 1 को लंबित कार्यवाही पर विचार करने और अंतिम निर्णय लेने का निर्देश देकर न्याय के उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है... जितनी जल्दी हो सके।"
हाईकोर्ट ने CAT को यह भी निर्देश दिया कि वह बिना किसी पक्ष को अनावश्यक स्थगन (Unnecessary Adjournment) दिए सुनवाई पूरी करे, बशर्ते कोई कानूनी बाधा न हो।
साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (Merit) पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
बेंच ने कहा, "यह स्पष्ट किया जाता है कि कोर्ट ने किसी भी पक्ष के मामले के गुण-दोष की जांच नहीं की है और संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार सख्ती से मामले का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होंगे।"
इस निर्देश के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।


