सुप्रीम कोर्ट की यूपी पुलिस को सख्त फटकार, बोला - सभी जांच CBI को दे दें, पुलिस भंग करने पर विचार करें
Supreme Court slams UP Police in Bulandshahr molestation case, says department should be dissolved and all probes handed over to CBI, Justice Sanjay Kumar bench pulls up UP Police for FIR irregularities in 2021 Khurja Nagar case.
INDIA NEWS REPORT
कुलदीप बरनवाल
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सख्त नाराजगी जताई है। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने 30 सितंबर को एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि यूपी पुलिस को भंग कर इसकी सभी जांच सीबीआई को सौंप देनी चाहिए।
पीठ बुलंदशहर जिले के खुर्जा नगर थाने में 2021 में दर्ज छेड़छाड़ के एक मामले में अग्रिम जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिकाकर्ता वीणा सलूजा ने अदालत को बताया कि घटना के समय आरोपी को मौके पर पकड़कर पुलिस को सौंपा गया था, लेकिन पुलिस ने एफआईआर अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की। हाईकोर्ट द्वारा स्टेटस रिपोर्ट मांगे जाने के बाद ही आरोपी का नाम चार्जशीट में जोड़ा गया, जिसे बाद में क्लीन चिट दे दी गई।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि जब्त की गई मोटरसाइकिल पर जब्ती के समय नंबर प्लेट नहीं थी, जिसे बाद में जांच में जोड़ दिया गया। साथ ही शिकायत का समय भी रिकॉर्ड में गलत दर्ज किया गया।
इस पर पीठ ने यूपी पुलिस के हलफनामे पर असंतोष जताते हुए कहा कि पुलिस की कार्यशैली में एजेंडा दिखता है और यह भरोसे के लायक नहीं है। अदालत ने कहा कि पुलिस का कार्य मामले को उजागर करना है, न कि उसे ढंकना।
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित थाना अध्यक्ष को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है।
*नोट:* अदालत की यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान की गई मौखिक टिप्पणी है।


