दिल्ली में फिर वही ग़ज़ल जिंदा है ! - दुष्यंत कुमार | Delhi Protest

दुष्यंत की ग़ज़ल 'होने लगी है जिस्म में जुम्बिश तो देखिए' 2026 के दिल्ली CJP प्रोटेस्ट, Jantar Mantar, मेट्रो बंद, SIR पर बिल्कुल फिट है। दर्द भरी व्याख्या / विश्लेषण

दिल्ली में फिर वही ग़ज़ल जिंदा है ! - दुष्यंत कुमार | Delhi Protest
दिल्ली में फिर वही ग़ज़ल: चाकू पसलियों में है और गुज़ारिश है शांति बनाए रखें

दिल्ली में फिर वही ग़ज़ल जिंदा है - दुष्यंत कुमार की द्देश का भविष्य कहे जाने वाले युवा सड़कों पर है ,लोग मांग कर रहे है और..

दुष्यंत कुमार चले गए, पर उनकी ग़ज़ल आज भी दिल्ली पुलिस की बैरिकेडिंग पर टंगी हुई है।

1. "होने लगी है जिस्म में जुम्बिश तो देखिए, इस पर कटे परिंदे की कोशिश तो देखिए।"

10 अक्टूबर को दिल्ली में वही कटा परिंदा था। CJP के लड़के। फ्लाइट से उतरते ही एयरपोर्ट पर पकड़ लिए गए Abhijeet Dipke, Saurav, Ashutosh। परिंदा तो कैद कर लिया, पर कोशिश? वो आज भी 12 अक्टूबर को फिर जंतर-मंतर का call दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट को कहना पड़ा कि मेट्रो पर outright ban मत करो। जिस्म में जुम्बिश तो अभी भी है।

2. "गूँगे निकल पड़े हैं ज़बाँ की तलाश में, सरकार के ख़िलाफ़ ये साज़िश तो देखिए।"

कल जिनको कभी राजनीति से मतलब नहीं था - छात्र, युवा, गुरुद्वारा में रात गुजारने वाले - सब सड़क पर आ गए। वोटर लिस्ट में गड़बड़ी का सवाल पूछने। और सिस्टम ने क्या कहा? Permission denied, Section 163 BNSS, 20 FIR, 3000 detention, इंटरनेट बंद। सवाल पूछना ही साजिश बना दिया गया।

3. "बरसात आ गई तो दरकने लगी ज़मीन, सूखा मचा रही है ये बारिश तो देखिए।"

ये सबसे दर्द भरा शेर है। SIR - Special Intensive Revision - नाम तो सुधार का है। वोटर लिस्ट साफ करने की बारिश। पर आरोप है कि इसी बारिश से ज़मीन और दरक रही है। लोग कह रहे हैं इसी से वोट कट रहे हैं। मदद के नाम पर आई चीज ही तकलीफ बन गई।

4. "उन की अपील है कि उन्हें हम मदद करें, चाक़ू की पसलियों से गुज़ारिश तो देखिए।"

45 मेट्रो स्टेशन बंद, ट्रेनें कैंसिल, 4 KM तक इंटरनेट बंद, 30,000 पुलिस। पहले पूरा शहर बंद करो, फिर अपील करो कि शांति बनाए रखो। चाकू पसलियों में है और गुजारिश है कि सहयोग कीजिए।

5. "जिस ने नज़र उठाई वही शख़्स गुम हुआ, इस जिस्म के तिलिस्म की बंदिश तो देखिए।"

जिसने भी नज़र उठाई - बंगला साहिब गुरुद्वारे से उठा लिया, Connaught Place से बस में भर लिया, महिला कार्यकर्ताओं को शाम 6 बजे के बाद detain किया। नज़र उठाने वाला गुम है, तिलिस्म की बंदिश वैसी की वैसी है।

दुष्यंत ने 1975 में लिखा था, आज 2026 में दिल्ली में वही दोहराया जा रहा है। फर्क सिर्फ इतना है - तब भी परिंदा कोशिश कर रहा था, आज भी कर रहा है।