Raghopur Boat Tragedy: राघोपुर नाव हादसे में 14 बच्चों की मौत, हीरो धर्मेंद्र ने अंधेरे में 17 को निकाला, 24 साल पुरानी जर्जर नाव में था छेद
Vaishali के Raghopur में गंगा में नाव पलटने से 14 बच्चों की मौत, 21 सवार थे। हीरो धर्मेंद्र ने 17 को निकाला। 24 साल पुरानी जर्जर नाव बनी वजह। CM ने 4 लाख मुआवजा दिया।
यश राज शर्मा- बिहार - Vaishali / Raghopur, 14 October 2026
बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में मंगलवार रात हुआ नाव हादसा पूरे बिहार को हिला गया है। गंगा की धारा में नाव पलटने से 14 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई है। यह हादसा राघोपुर प्रखंड के रामपुर श्यामचंद गांव के पास रात 8:30 बजे हुआ।
कैसे हुआ हादसा?
रामपुर श्यामचंद के 21 लोग, जिनमें 10 से 14 साल के बच्चे ज्यादा थे, पड़ोसी गांव में श्राद्ध भोज खाकर नाव से घर लौट रहे थे। गंगा की इस धारा में कटाव के कारण 20 फीट गहरा पानी है। बीच धारा में नाव पलट गई और अंधेरे में बच्चे डूब गए।
नंबर्स का कन्फ्यूजन खत्म - असली आंकड़ा क्या है?
कुल सवार: 21 लोग (पहले 25 बताया जा रहा था)
मौत: 14 बच्चे
जिंदा बचे: 7 लोग
हीरो धर्मेंद्र ने 17 को निकाला तो 14 मरे कैसे?
स्थानीय युवक धर्मेंद्र कुमार ने जैसे ही हादसे की खबर सुनी, कपड़े उतारकर अंधेरे में गंगा में कूद गया। उसने टॉर्च के बिना ही 17 बच्चों को पानी से खींचकर बाहर निकाला।
इन 17 में से 14 बच्चों की मौत हो चुकी थी या अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया। 3 बच्चे जिंदा बच गए। बाकी के 4 लोग तैरकर खुद बाहर आ गए। इसी वजह से कुल 7 लोग बच पाए।
धर्मेंद्र ने कहा - "भरोसा रखो बेटा, हाथ दो... मैंने चिल्लाया और एक-एक को खींचा।"
हादसे की असली वजह - दो लापरवाही:
1. 24 साल पुरानी जर्जर नाव: नाव 23-24 साल पुरानी थी, लकड़ी सड़ चुकी थी, नीचे बड़ा छेद था। 4 घरों की प्राइवेट नाव थी। ग्रामीणों ने पहले ही प्रशासन को शिकायत दी थी।
2. ओवरलोडिंग: 7-8 लोगों की क्षमता वाली नाव पर 21 लोग सवार थे, क्षमता से 3 गुना ज्यादा।
गांव में मातम, एक साथ 14 अर्थियां:
मरने वाले सभी 14 बच्चे एक ही गांव रामपुर श्यामचंद के हैं। एक साथ 14 अर्थियां उठने से पूरा गांव गम में डूब गया है।
सरकार का ऐलान:
CM सम्राट चौधरी: 4-4 लाख मुआवजा, ट्वीट कर शोक जताया - "समाचार अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है।"
PM मोदी: PMNRF से 2-2 लाख मृतकों को, 50 हजार घायलों को।
तेजस्वी यादव: आज राघोपुर जाएंगे, पीड़ित परिवारों से मिलेंगे।


