वाराणसी: लक्ष्मीकुंड में सोरहिया मेले का समापन और जीवित्पुत्रिका व्रत का महासंयोग, उमड़ा आस्था का सैलाब

काशी के लक्ष्मीकुंड में आज दो महाव्रतों का संगम! 16 दिन के सोरहिया मेले का समापन और माताओं का कठिन जीवित्पुत्रिका (जितिया) निर्जला व्रत। जानें पूजा विधि और मान्यता।

वाराणसी: लक्ष्मीकुंड में सोरहिया मेले का समापन और जीवित्पुत्रिका व्रत का महासंयोग, उमड़ा आस्था का सैलाब

                           INDIA NEWS REPORT 

कुलदीप बरनवाल 

वाराणसी, 3 अक्टूबर 2026: काशी में आज दो महाव्रतों का अद्भुत संगम है। लक्सा स्थित प्राचीन लक्ष्मीकुंड महालक्ष्मी मंदिर पर 16 दिन से चल रहे सोरहिया मेले का आज समापन हो रहा है, तो वहीं दूसरी ओर आज ही जीवित्पुत्रिका (जितिया) का मुख्य निर्जला व्रत भी है।

लक्ष्मीकुंड - काशी का प्राचीन शक्ति केंद्र

मान्यता है कि इस कुंड का निर्माण महर्षि अगस्त्य ने और मंदिर का निर्माण देवताओं ने किया था। यहां की सबसे बड़ी खासियत है कि एक ही गर्भगृह में महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली तीनों देवियों की प्रतिमा एक साथ विराजमान है।

सोरहिया मेले में महिलाएं पिछले साल की लक्ष्मी प्रतिमा को कुंड में विसर्जित कर नई प्रतिमा घर ले जाती हैं, विष्णु मंदिर में लक्ष्मी-विष्णु विवाह कराती हैं, 16 गांठ के धागे, 16 दूर्वा, 16 अक्षत और आटे के 16 दीपक जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

आज ही क्यों है जीवित्पुत्रिका व्रत?

सोरहिया व्रत का अंतिम दिन हमेशा जितिया अष्टमी को ही पड़ता है।

जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व: यह बिहार, यूपी, झारखंड की माताओं का सबसे कठिन व्रत है। माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र और सुरक्षा के लिए 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं।

कथा: राजा जीमूतवाहन ने नागों की रक्षा के लिए गरुड़ को अपना शरीर दान कर दिया था। उनके त्याग से प्रसन्न होकर नागों ने वरदान दिया कि जो माता आज के दिन व्रत करेगी, उसका पुत्र जीवित रहेगा। इसलिए इसे जीवित्पुत्रिका कहा गया।

पूजा विधि: आज सुबह महिलाओं ने ओठगन / सरगी की है, अब पूरे दिन अन्न-जल त्याग कर कुशा से बनी जीमूतवाहन की प्रतिमा और गोबर से बनी चील-सियारिन की पूजा करेंगी, जितिया कथा सुनेंगी और कल 4 अक्टूबर सुबह 7:28 बजे के बाद पारण करेंगी।

लक्ष्मीकुंड पर दोहरा नजारा

आज सुबह से ही लक्ष्मीकुंड पर हजारों महिलाएं दो काम एक साथ कर रही हैं - सोरहिया की नई प्रतिमा घर ले जाना और जितिया का निर्जला व्रत शुरू करना। मंदिर प्रशासन के अनुसार भीड़ पिछले साल से ज्यादा है, इसलिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।