निर्भया से 2026 तक: कानून की किताब सख्त हुई, दरिंदों में खौफ नहीं - 12 साल में 4 लाख केस, सजा सिर्फ 24% को
NCRB रिपोर्ट के मुताबिक 2012 से 2024 तक देश में 4 लाख से ज्यादा रेप केस दर्ज हुए, हर 18 मिनट में एक शिकायत। कानून में फांसी तक का प्रावधान आया, फिर भी सिर्फ 24% को सजा मिली।
प्रज्ञा मिश्रा । स्पेशल रिपोर्ट । 16 दिसंबर 2012 की वो काली रात जिसने पूरे देश को हिला दिया था। निर्भया कांड के बाद देश सड़कों पर था और सरकार ने वादा किया था कि अब कानून इतना सख्त होगा कि कोई ऐसी हिम्मत नहीं करेगा। 14 साल बाद 2026 में सवाल वही है, क्या वाकई कुछ बदला है?
NCRB का आंकड़ा क्या कहता है? NCRB के आंकड़ों के मुताबिक 2022 में 31,516, 2023 में 29,670 और 2024 में 29,536 रेप केस दर्ज हुए हैं। 2012 से 2024 तक यह आंकड़ा 4 लाख के करीब पहुंच चुका है। यानी आज भी हर दिन 80 से 84 बेटियां थाने में शिकायत लेकर पहुंच रही हैं, मतलब हर 18 मिनट में एक केस।
बच्चियों के खिलाफ अपराध में भी कमी नहीं आई है। साल 2024 में ही POCSO एक्ट के तहत 67,809 मामले दर्ज किए गए हैं, जो सबसे ज्यादा चिंताजनक है।
कानून सख्त हुआ, पर सजा क्यों नहीं मिल रही? निर्भया के बाद तीन बड़े बदलाव हुए। पहला निर्भया एक्ट 2013 जिसमें सजा 7 साल से बढ़ाकर 20 साल तक की गई। दूसरा POCSO संशोधन 2019 जिसमें 12 साल से कम उम्र की बच्ची से अपराध पर फांसी का प्रावधान जोड़ा गया। तीसरा फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया।
लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। NCRB 2024 की रिपोर्ट कहती है कि अदालत में जिन मामलों की सुनवाई पूरी हुई उनमें 68% आरोपी बरी हो गए और सिर्फ 24% को ही सजा मिल पाई। 2 लाख से ज्यादा केस आज भी अदालतों में पेंडिंग हैं।
सवाल सिस्टम से नहीं, मानसिकता से है। कठुआ में 8 साल की बच्ची, उन्नाव में नाबालिग, हैदराबाद में डॉक्टर बेटी, हाथरस और 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की ट्रेनी डॉक्टर। नाम और जगह बदलती है, लेकिन सोच नहीं बदल रही है। जांच में देरी, सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों का पलट जाना, सजा में देरी की सबसे बड़ी वजह बन रहे हैं।
निर्भया के दोषियों को फांसी तक पहुंचने में 7 साल लग गए, तो एक आम बेटी को न्याय मिलने में कितना समय लगेगा, यही सबसे बड़ा सवाल है जो 2012 से 2026 तक हर रिपोर्ट के अंत में खड़ा है।


