Shaheed-E-Azam Bhagat Singh Jayanti 2026: 119वीं जयंती पर विशेष रिपोर्ट, क्यों आज भी प्रासंगिक हैं भगत सिंह के विचार?

28 सितंबर 2026 - आज पूरा देश शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती मना रहा है। 28 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा गांव (वर्तमान पाकिस्तान) में जन्मे भगत सिंह ने 23 साल की छोटी सी उम्र में वो कर दिखाया जो सदियों तक याद रखा जाएगा।

Shaheed-E-Azam Bhagat Singh Jayanti 2026: 119वीं जयंती पर विशेष रिपोर्ट, क्यों आज भी प्रासंगिक हैं भगत सिंह के विचार?
भगत सिंह जी की 119 वीं जयंती और नौजवान भारत सभा शताब्दी वर्ष

INDIA NEWS REPORT की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बता रहे हैं वो 7 बातें जो आपको स्कूल की किताबों में नहीं मिलेंगी।

1. सिर्फ क्रांतिकारी नहीं, जबरदस्त लेखक और पत्रकार भी थे

बहुत कम लोग जानते हैं कि भगत सिंह 'किरती' और 'अकाली' अखबारों में बलवंत सिंह और विद्रोही जैसे नामों से लिखते थे। अंग्रेजी, हिंदी, उर्दू, पंजाबी और बंगाली भाषाओं पर उनकी गजब की पकड़ थी। जेल में उन्होंने 4 किताबें लिखीं जिनमें 'जेल नोटबुक' सबसे प्रसिद्ध है।

2. नौजवान भारत सभा - 100 साल का सफर

1926 में भगत सिंह ने 'नौजवान भारत सभा' बनाई थी। 2026 में इस सभा के 100 साल पूरे हो रहे हैं। इसका मकसद था - युवाओं को धर्म और जाति से ऊपर उठाकर एक सच्चे सेक्युलर भारत के लिए तैयार करना।

3. फिटनेस और अनुशासन के मिसाल

भगत सिंह रोज 2 घंटे व्यायाम करते थे। लाहौर के नेशनल कॉलेज में वो ड्रामेटिक्स क्लब के भी एक्टिव मेंबर थे और कई नाटकों में मुख्य भूमिका निभाई।

4. फांसी से एक रात पहले की आखिरी इच्छा

23 मार्च 1931 की शाम फांसी से ठीक पहले भगत सिंह लेनिन की किताब पढ़ रहे थे। जब जेलर ने कहा चलिए, तो उन्होंने कहा - "रुको, एक क्रांतिकारी दूसरे क्रांतिकारी से मिल रहा है।" किताब खत्म करके ही फंदे पर गए।

5. लाहौर से नलगढ़ा तक का सीक्रेट कनेक्शन

दिल्ली की असेंबली में फेंका गया बम नोएडा के नलगढ़ा गांव के जंगलों में बने गुप्त ठिकाने में बनाया गया था, जहां भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद छिपकर रहते थे।

6. परिवार का बलिदान

भगत सिंह के पिता किशन सिंह और चाचा अजीत सिंह दोनों बड़े स्वतंत्रता सेनानी थे। उनके परिवार ने तीन पीढ़ियों तक आजादी के लिए संघर्ष किया।

7. आज क्यों प्रासंगिक हैं?

भगत सिंह का नारा था - 'इंकलाब जिंदाबाद' सिर्फ नारा नहीं, एक सोच है। उन्होंने कहा था - "बम और पिस्तौल से क्रांति नहीं आती, क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है।" आज भ्रष्टाचार और अन्याय के दौर में उनके विचार युवाओं को सोचने पर मजबूर करते हैं।