खड़गे के "मोदी का बाप भी जाएगा" बयान पर बवाल, BJP का आज देशव्यापी प्रदर्शन - क्या नेताओं की भाषा हो गई अमर्यादित?

पटना में मल्लिकार्जुन खड़गे के "मोदी का बाप भी जाएगा" बयान पर सियासी घमासान। BJP ने आज देशव्यापी प्रदर्शन का किया ऐलान, कोतवाली में शिकायत। जानें पूरा विवाद।

खड़गे के "मोदी का बाप भी जाएगा" बयान पर बवाल, BJP का आज देशव्यापी प्रदर्शन - क्या नेताओं की भाषा हो गई अमर्यादित?
पटना में खड़गे के "मोदी का बाप भी जाएगा" बयान पर बवाल, BJP आज करेगी देशव्यापी प्रदर्शन।

 । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान ने बिहार से दिल्ली तक सियासी पारा हाई कर दिया है। पटना में रविवार को बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण बाबू की 139वीं जयंती समारोह के दौरान खड़गे ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।”

इस बयान के बाद भाजपा ने कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और आज सोमवार को देशभर के सभी प्रदेश मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया है। पटना के कोतवाली थाने में शिकायत भी दर्ज हुई है।

खड़गे ने क्या कहा - पूरा बयान:

कार्यक्रम में खड़गे SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया में कथित धांधली को लेकर बोल रहे थे। उन्होंने कहा था कि सत्ता में आने पर दोषियों को जेल भेजा जाएगा।

तभी सामने बैठे एक युवक ने कहा - “जब तक विद्रोह नहीं होगा, मोदी नहीं जाएगा।”

इस पर खड़गे भड़क गए और माइक से कहा - “मोदी का बाप भी जाएगा, बाप भी जाएगा। चल ,तुम मत सोचो।”

वहीं कांग्रेस की सफाई है कि पहले युवक ने कहा था - “तुम्हारा बाप भी आए तो मोदी नहीं जाएगा” - जिसके जवाब में खड़गे ने ये पलटवार किया और उनका इशारा वैचारिक पिता RSS की ओर था।

भाजपा ने इसे प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का अपमान बताया है। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि खड़गे ने शालीनता की सारी हदें पार कर दीं।

नेताओं की भाषा क्यों हो जाती है अमर्यादित?

पटना में मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान—“मोदी का बाप भी जाएगा”—अब सियासी विवाद का मुद्दा बन गया है।

लेकिन सवाल सिर्फ एक बयान का नहीं, भारतीय राजनीति के गिरते संवाद-स्तर का भी है।

सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, जनता को गाली-गलौज नहीं, रोजगार, महंगाई, शिक्षा और विकास पर जवाब चाहिए।

लोकतंत्र में नेता शब्दों से नहीं, अपने काम और तर्कों से बड़े बनते हैं।

राजनीति में मर्यादा जरूरी है या अब विवाद ही चुनावी हथियार बन गया है?