दिल्ली में महाभारत: रामलीला में 'वोट चोरी' का शोर, तिलक नगर में '84 का हिसाब', जाम में फंसी जनता

दिल्ली में दो प्रदर्शन आमने-सामने, राहुल का वोट चोरी मार्च Vs BJP का 1984 मार्च, जाम और व्यापारियों की चिंता के बीच कुरुक्षेत्र बनी रामलीला, देखें पूरी रिपोर्ट

दिल्ली में महाभारत: रामलीला में 'वोट चोरी' का शोर, तिलक नगर में '84 का हिसाब', जाम में फंसी जनता
दिल्ली में आमने-सामने दो प्रदर्शन, राहुल का वोट चोरी मार्च बनाम बीजेपी का 1984 मार्च, जाम और बंद दुकानों के बीच रामलीला बनी कुरुक्षेत्र

अनुराग पांडेय । एक रिपोर्ट- कभी-कभी दिल्ली सिर्फ राजधानी नहीं लगती, पूरा देश लगती है। आज वही दिन था। एक तरफ रामलीला मैदान, दूसरी तरफ तिलक नगर। एक तरफ वोट चोरी का आरोप, दूसरी तरफ 1984 का हिसाब।

पहला मोर्चा - रामलीला बनी कुरुक्षेत्र

वही मैदान जहां अन्ना ने अनशन किया था, जहां केजरीवाल ने सरकार बनाई थी। आज वहां फिर भीड़ थी। राहुल गांधी ने ट्रक को रथ बना दिया। मिंटो रोड से रामलीला तक काफिला निकला। साथ में ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव मौजूद रहे। हाथ में वोटर लिस्ट की कॉपी थी।

राहुल गांधी ने माइक पकड़ा और बोले - "भाईयों-बहनों, आपके जेब से पैसा नहीं, अब वोट निकाला जा रहा है। SIR के नाम पर 13 करोड़ वोटों का साइलेंट मर्डर हुआ है।" उनकी मांग थी कि CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।

दूसरा मोर्चा - तिलक नगर में 1984 की याद

और ठीक उसी वक्त वेस्ट दिल्ली में दूसरा मंच सजा था। वहां DJ नहीं, ढोल नहीं, सिर्फ सन्नाटा और हाथों में पुरानी फोटो। 1984 में जले हुए घरों की फोटो। बीजेपी ने हरि नगर से तिलक नगर तक उन्हीं गलियों में इंसाफ मार्च निकाला जहां 42 साल पहले आग लगी थी।

बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा सिख बुजुर्गों के साथ चले। नारा गूंजा - "भूले नहीं हैं, माफ नहीं किया। वोट चोरी का ज्ञान वो दे रहे हैं जिनके हाथ 1984 में खून से रंगे थे।"

लखनऊ से दिल्ली तक असर

इस सियासी महाभारत का असर लखनऊ तक दिखा। हजरतगंज चौराहे पर समाजवादी छात्र सभा ने तख्ती लहराई। पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।

अभिमन्यु कौन? आम जनता

दोनों बड़े खिलाड़ी अपना गेम खेल गए। पिस रही है दिल्ली। 6 घंटे तक सेंट्रल दिल्ली लॉक रही, ITO और मिंटो रोड पर भयंकर जाम लगा, कनॉट प्लेस में 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। चैंबर ऑफ ट्रेड का दावा है कि हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है।

असली खेल नैरेटिव का है

ये लड़ाई वोट लिस्ट की नहीं, नैरेटिव की है। एक नैरेटिव कह रहा है कि भविष्य खतरे में है - तुम्हारा वोट काटा जा रहा है। दूसरा नैरेटिव कह रहा है कि भूत मत भूलो - जिन्होंने 1984 में खून बहाया वो आज लोकतंत्र की बात कर रहे हैं। एक 2029 के लिए डर बुन रहा है, दूसरा 1984 के लिए गुस्सा। और बीच में आज का भारत जाम में खड़ा है।