निठारी कांड के बरी आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत, चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला शव - 19 साल बाद भी अनसुलझा है सच
निठारी कांड के बरी आरोपी सुरेंद्र कोली की 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में चाय की दुकान में फंदे से लटकी लाश मिली। सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के 310 दिन बाद हुई मौत से 19 साल पुराना निठारी कांड फिर सुर्खियों में,फिर कांप उठी रूह यादकर निठारी कांड,सुरेंद्र कोली को आदमखोर कहते थे लोग!
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रूह कांप उठी फिर याद आया 'आदमखोर' जहन में दौड़ गया निठारी कांड
हरिद्वार/2006 के निठारी कांड से देश को दहलाने वाले सुरेंद्र कोली की 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। पुलिस के मुताबिक वह उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने अपनी चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला।
कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में रह रहा था और सड़क किनारे चाय का खोखा चला रहा था। वह अल्मोड़ा के भिकियासैंण इलाके के मंगरुखला गांव का रहने वाला था। पुलिस ने परिवार को सूचना दे दी है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है।
उसकी मौत सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के 310 दिन के अंदर हुई है। इससे पहले वह जेल में लगभग 19 साल यानी 6,935 दिन रहा था।
2006 से 2026 तक: निठारी कांड की पूरी टाइमलाइन
दिसंबर 2006 - कांड का खुलासा: नोएडा के सेक्टर-31 में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंधेर की डी-5 कोठी के पीछे नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल और कपड़े बरामद हुए। पुलिस ने पंधेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया।
जनवरी 2007 - CBI जांच: मामले की गंभीरता देखते हुए जांच CBI को सौंपी गई। कोली पर अपहरण, बलात्कार और हत्या के 16 से ज्यादा केस दर्ज हुए।
2009 से 2011 - फांसी की सजा: गाजियाबाद की विशेष CBI अदालत ने कोली को कई मामलों में फांसी की सजा सुनाई, जिसे 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
2014-2015 - फांसी पर रोक: 2014 में मेरठ जेल में फांसी की तैयारी पूरी हो चुकी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। 2015 में दया याचिका में देरी के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फांसी को उम्रकैद में बदला।
अक्टूबर 2023 - हाईकोर्ट से बड़ी राहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI की जांच को लचर और कमजोर बताते हुए 12 मामलों में कोली को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा जांच एजेंसियां पुख्ता वैज्ञानिक सबूत पेश करने में नाकाम रहीं।
11 नवंबर 2025 - सुप्रीम कोर्ट से अंतिम बरी: सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित मामले में भी कोली की दोषसिद्धि रद्द कर दी और तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। CJI बी.आर. गवई की पीठ ने कहा कि कोली को पहले ही 12 मामलों में बरी किया जा चुका है।
18 सितंबर 2026 - गुमनाम मौत: जेल से छूटने के बाद कोली हरिद्वार में पहचान छिपाकर रह रहा था और चाय का खोखा चलाता था। वहीं उसका शव लटका मिला।
मौत पर क्यों उठ रहे सवाल?
पुलिस शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या मान रही है।
लेकिन कोली के परिजन और पीड़ित परिवार इसे सोची-समझी साजिश बता रहे हैं। उनका सवाल है कि 19 साल तक कानूनी लड़ाई लड़कर बेगुनाही साबित करने वाला व्यक्ति नई जिंदगी शुरू करने के कुछ महीनों बाद ही आत्महत्या क्यों करेगा। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
क्यों आज भी रहस्य है निठारी कांड?
कानूनी तौर पर कोली और पंधेर दोनों बरी हो चुके हैं, लेकिन जांच में बड़ी खामियां उजागर हुईं:
1. फॉरेंसिक सबूतों का अभाव: कोठी के अंदर से खून के धब्बे या फिंगरप्रिंट जैसे कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं मिले जो हत्या कोठी में होने को साबित कर सकें।
2. जबरन कबूलनामा: शुरुआती भयानक कबूलनामे को अदालत ने थर्ड-डिग्री टॉर्चर से लिया गया माना, उस पर हस्ताक्षर तक नहीं थे।
3. अनसुलझा एंगल: शवों को पेशेवर तरीके से काटे जाने से अंग तस्करी का शक जताया गया था, लेकिन CBI इस एंगल पर बड़े नेटवर्क तक नहीं पहुंच सकी।
19 साल बाद सच यही है कि 16 से ज्यादा बच्चों की जान गई, नाले से कंकाल मिले, लेकिन कानून आज भी यह तय नहीं कर पाया कि असली कातिल कौन था।


