उज्जैन के रामघाट स्थित चित्रगुप्त मंदिर का रहस्य, जहां लोग मौत की मन्नत मांगने आते हैं
उज्जैन के शिप्रा नदी के रामघाट पर स्थित धर्मराज चित्रगुप्त मंदिर का अनोखा राज। यहां लोग जीवन नहीं बल्कि कष्ट से मुक्ति और मोक्ष के लिए घी का दीया जलाते हैं, 24 घंटे में मिलता है परिणाम।
India News Report-
उज्जैन। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में एक ऐसा मंदिर है जहां लोग लंबी उम्र नहीं बल्कि मौत की प्रार्थना करने आते हैं। शिप्रा नदी के रामघाट पर स्थित श्री धर्मराज चित्रगुप्त मंदिर अपनी अनोखी और चौंकाने वाली मान्यता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है।
आमतौर पर मंदिरों में लोग सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना लेकर जाते हैं, लेकिन इस मंदिर में उलटी मन्नत मांगी जाती है। यहां वो लोग आते हैं जिनके परिजन लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं और जीवन-मृत्यु के बीच तड़प रहे हैं।
क्या है मान्यता और कैसे होती है पूजा?
मान्यता के अनुसार, जब कोई व्यक्ति असहनीय कष्ट में हो तो उसके परिजन मंदिर में उसके नाम से घी का दीया जलाते हैं। पुजारी पंडित राकेश जोशी बताते हैं कि प्रार्थना की जाती है कि हे धर्मराज, या तो इस जीव को स्वस्थ कर दो या इसे इस कष्ट से मुक्ति देकर मोक्ष प्रदान करो।
स्थानीय लोगों का दावा है कि पूजा के 24 घंटे के अंदर परिणाम सामने आ जाता है। या तो मरीज की तबीयत में चमत्कारिक रूप से सुधार हो जाता है या उसकी शांतिपूर्ण मृत्यु हो जाती है, जिसे मोक्ष के रूप में देखा जाता है।
400 साल पुराना और कर्क रेखा पर स्थित मंदिर
यह मंदिर करीब 400 साल पुराना बताया जाता है और इसके ऊपर से कर्क रेखा गुजरती है। स्कंद पुराण में भी इसका उल्लेख है। यही भारत का इकलौता मंदिर है जहां यमराज यानी धर्मराज और उनके मंत्री चित्रगुप्त एक साथ विराजमान हैं।


