Gen Z नहीं हो तो Gen Z आंदोलन क्यों?" हाई कोर्ट में सौरभ-आशुतोष से तीखे सवाल, याचिका वापस
दिल्ली हाई कोर्ट में CJP नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका की सुनवाई हुई। जज ने बॉन्ड उल्लंघन और Gen Z प्रोटेस्ट पर सवाल पूछे, जिसके बाद याचिका वापस ले ली गई।
नई दिल्ली। जंतर-मंतर प्रोटेस्ट केस में जेल में बंद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरभ दास और आशुतोष रांका की याचिका पर आज दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने दशहरा छुट्टी के बावजूद अर्जेंट हियरिंग को मंजूरी दी। दोपहर 12:20 बजे सुनवाई शुरू हुई।
कोर्ट में जज ने क्या पूछा?
1. "आप 27 और 32 साल के हो, Gen Z नहीं हो, फिर Gen Z आंदोलन क्यों?"
2. "आपने 11 अक्टूबर को शांति बॉन्ड तोड़ा है, अब दोबारा बॉन्ड पर जोर देना गैरकानूनी कैसे?"
3. "आप बैरिकेड तोड़कर गए, आपके पीछे 10-20 लोग आ जाते तो आगजनी भी हो सकती थी।"
CJP के वकील अभिक चिमनी ने कहा कि 2 नए मुचलके दिए थे पर SEM कोर्ट ने वेरिफिकेशन के लिए बुलाया ही नहीं।
वहीं पुलिस की ओर से ASG चेतन शर्मा ने कहा कि मुचलके फर्जी हैं, आधार की फोटो मैच नहीं करती।
जज ने कहा कि आज दोपहर 2 बजे SEM कोर्ट में ही मुचलकों पर सुनवाई हो रही है, इसलिए हाई कोर्ट में राहत नहीं मिल सकती। इसके बाद वकील ने याचिका वापस ले ली।
बैकग्राउंड: दोनों नेता 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर के लॉक गेट को कूदकर अंदर घुसे थे। वहाँ तिरंगा फहराया और CEC के खिलाफ नारे लगाए। जंतर-मंतर को अब प्रोटेस्ट साइट से डीनोटिफाई कर दिया गया है। अब दोनों केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर हो चुके हैं।


