जमुई दरिंदगी: मासूम से हैवानियत के बाद सोशल मीडिया पर दूसरी दरिंदगी, वायरल हो रहे वीडियो पर कानून मौन क्यों?

जमुई में मासूम से दरिंदगी के बाद सोशल मीडिया पर पीड़िता के वीडियो वायरल। POCSO एक्ट के बावजूद पहचान विडिओ क्यों? कानून और संवेदनशीलता पर सवाल।

जमुई दरिंदगी: मासूम से हैवानियत के बाद सोशल मीडिया पर दूसरी दरिंदगी, वायरल हो रहे वीडियो पर कानून मौन क्यों?

                         INDIA NEWS REPORT 

कुलदीप बरनवाल 

पटना/जमुई। बिहार के जमुई जिले में एक मासूम बच्ची के साथ हुई दरिंदगी की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। इस जघन्य अपराध से अभी समाज उबरा भी नहीं था कि सोशल मीडिया पर संवेदनहीनता की दूसरी दरिंदगी शुरू हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, इस घटना से जुड़े वीडियो और फोटो को लोग बिना सोचे-समझे व्हाट्सएप स्टेटस, इंस्टाग्राम रील और फेसबुक पर शेयर कर रहे हैं। व्यूज और फॉरवर्ड के चक्कर में यह कृत्य पीड़िता के लिए दोहरे उत्पीड़न जैसा बन गया है।

कानून क्या कहता है?

कानून इस मामले में बेहद स्पष्ट है।

- पॉक्सो एक्ट की धारा 23 के तहत पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

- आईटी एक्ट की धारा 67B के तहत बाल यौन शोषण सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करना गंभीर दंडनीय अपराध है।

ऐसा करने पर 5 से 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पीड़िता का वीडियो शेयर करना अपराध को रोकना नहीं, बल्कि अपराध को आगे बढ़ाना है। इससे पीड़िता की गरिमा, सुरक्षा और भविष्य तीनों पर गहरा असर पड़ता है।

सवाल :

जब कानून में सजा का प्रावधान स्पष्ट है तो वीडियो स्टेटस पर लगाने वालों पर FIR क्यों नहीं?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ऐसे कंटेंट को ऑटो-डिटेक्ट कर तुरंत क्यों नहीं हटा रहे?

प्रशासन लोगों में जागरूकता के लिए साइबर एडवाइजरी क्यों नहीं जारी कर रहा?

पीड़िता को न्याय दिलाने का पहला कदम उसकी पहचान को गुप्त रखना है। अगर आपके पास भी ऐसा कोई वीडियो आया है तो उसे फॉरवर्ड न करें, डिलीट करें और 1098 (चाइल्डलाइन) या 112 पर या नजदीकी थाने में रिपोर्ट करें।

Disclaimer: इस खबर का उद्देश्य किसी भी तरह से अपराध का महिमामंडन नहीं, बल्कि पीड़िता की गोपनीयता और कानून के प्रति जागरूकता फैलाना है। हमने पीड़िता से जुड़ी कोई भी पहचान उजागर करने वाली जानकारी प्रकाशित नहीं की है।