BHU के 1997 छात्र आंदोलन केस में मनोज सिंह ‘काका’ और राजेश राय ‘डल्लू’ को बड़ी राहत, अग्रिम जमानत मंजूर
कोर्ट ने 30 सितंबर को दिया आदेश, 1 लाख के निजी मुचलके पर मिली जमानत; वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिपाठी, त्रिवेदी और शुक्ला की दलीलों पर अदालत ने दी राहत
INDIA NEWS REPORT
कुलदीप बरनवाल
वाराणसी | | 03 अक्टूबर 2026
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के चर्चित 1997 छात्र आंदोलन प्रकरण में आरोपी मनोज कुमार सिंह उर्फ मनोज सिंह ‘काका’ और राजेश कुमार राय उर्फ ‘डल्लू’ को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
माननीय अपर सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-01, वाराणसी ने 30 सितंबर 2026 को दोनों की अग्रिम जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है।
क्या है मामला?
यह मामला थाना लंका, जनपद वाराणसी में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 22/1997 से जुड़ा है। लगभग तीन दशक पुराने इस केस में विभिन्न धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया था। न्यायालय ने अभियोजन पक्ष के कथन, प्रकरण के अभिलेखों और बचाव पक्ष के तर्कों पर विस्तार से विचार करने के बाद यह आदेश पारित किया।
तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं की प्रभावी पैरवी
अभियुक्तों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश त्रिवेदी और वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष शुक्ला ने संयुक्त रूप से पैरवी की। न्यायालय के समक्ष मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं को मजबूती से रखा गया, जिसके परिणामस्वरूप यह राहत मिली।
इस सफलता पर अधिवक्ता दीपक वर्मा, मोनी श्रीवास्तव, गुलशन मिश्रा और श्वेता अग्रहरि ने प्रसन्नता व्यक्त की और इसे प्रभावी विधिक पैरवी की उपलब्धि बताया।
*वरिष्ठ अधिवक्ता ने क्या कहा?
वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा, “यह प्रकरण लगभग तीन दशक पुराना है। ऐसे मामलों में न्यायालय द्वारा उपलब्ध अभिलेखों, आरोपों और कानूनी आधारों का स्वतंत्र परीक्षण महत्वपूर्ण है। अधिवक्ता का दायित्व है कि वह अपने मुवक्किल के विधिक अधिकारों की प्रभावी रक्षा करे और सभी प्रासंगिक तथ्य न्यायालय के समक्ष रखे।”
जमानत की शर्तें
न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को 1,00,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि के दो प्रतिभूति बंधपत्र प्रस्तुत करने की शर्त पर अग्रिम जमानत प्रदान की है। साथ ही न्यायालय द्वारा निर्धारित अन्य शर्तों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अधिवक्ता टीम ने आदेश पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कानून के शासन में प्रत्येक व्यक्ति के विधिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी पैरवी जारी रहेगी।


