आस्था कुंज गैंगरेप के बाद दिल्ली में छात्र आंदोलन, "मर्द-औरत" की बहस तेज

DDA के नाइट एंट्री कंट्रोल के फैसले पर छात्राएं सड़कों पर, लड़कों ने कहा - पूरे जेंडर को अपराधी मत बनाओ

आस्था कुंज गैंगरेप के बाद दिल्ली में छात्र आंदोलन, "मर्द-औरत" की बहस तेज
एक कचौड़ी दो समोसा पूरा सच क्या है?

INDIA NEWS REPORT

नई दिल्ली | 4 अक्टूबर 2026 दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय नाबालिग से कथित गैंगरेप की घटना के बाद राजधानी में महिला सुरक्षा को लेकर नया छात्र आंदोलन खड़ा हो गया है।

पुलिस के मुताबिक पार्क की चारदीवारी टूटी हुई थी और गेट पर सीसीटीवी नहीं था। घटना के बाद DDA ने सभी बड़े पार्कों में सूर्यास्त के बाद प्रवेश नियंत्रित करने का आदेश दिया। इसी के बाद 30 सितंबर से दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ और साउथ कैंपस और जंतर-मंतर पर LSR, गार्गी, मिरांडा हाउस, राजधानी कॉलेज की छात्राओं का प्रदर्शन शुरू हुआ।

प्रदर्शन में

  "शर्म नहीं है मर्दों में, औरत क्यों है पर्दों में" और "एक कचौड़ी दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा"

जैसे नारे लगे, जो सोशल मीडिया पर वायरल हैं।

प्रदर्शनकारियों का पक्ष: छात्राओं का कहना है कि हर घटना के बाद पाबंदी लड़कियों पर ही क्यों आती है - रात में मत निकलो, अकेले मत जाओ। उनका सवाल है कि सुरक्षा की गाइडलाइन समाज और सिस्टम के लिए क्यों नहीं बनती, जैसे लाइट, सीसीटीवी, पेट्रोलिंग और तेज जांच।

मर्दों का पक्ष और मर्द का दर्द जो अक्सर नहीं लिखा जाता:

इस बहस में पुरुष छात्रों ने कहा कि उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए।

सबको एक जैसा ठहराना: एक अपराध की वजह से पूरे लड़कों को शक की नजर से देखना गलत है। इससे कॉलेज जाने वाला आम छात्र भी खुद को अपराधी महसूस करता है।

बोलने की दुविधा: इस मुद्दे पर बोलो तो ट्रोल होते हैं, चुप रहो तो कहा जाता है तुम्हें फर्क नहीं पड़ता।

दोहरा दबाव: समाज एक तरफ मर्द से उम्मीद करता है कि वह रक्षा करे, रात में साथ जाए, आगे खड़ा हो। दूसरी तरफ उसी को खतरा भी बता देता है। इस दोहरे पैमाने से मानसिक तनाव बढ़ता है।

अनसुनी समस्याएं: रात में पुरुषों के साथ लूटपाट, मारपीट, और झूठे आरोप के डर जैसे मुद्दों पर बात ही नहीं होती। उन्हें अपनी बात रखने के लिए कोई सुरक्षित जगह नहीं मिलती।

निष्कर्ष: प्रदर्शन में शामिल कई छात्र-छात्राओं ने कहा कि असली लड़ाई मर्द बनाम औरत नहीं, बल्कि अपराध बनाम लचर सुरक्षा व्यवस्था की है। मांग यही है कि पार्कों में लाइट, सीसीटीवी, महिला-पुरुष दोनों के लिए सुरक्षित पेट्रोलिंग और तेज न्याय प्रक्रिया लागू हो, ताकि पाबंदी किसी एक जेंडर पर न हो, सुरक्षा सबके लिए हो।