व्यक्तिगत विवादों को जातीय-धार्मिक रंग देने पर रोक लगे : भाजपा विधि प्रकोष्ठ के काशी क्षेत्र संयोजक शशांक शेखर त्रिपाठी ने प्रमुख सचिव गृह और DGP को लिखा पत्र
वाराणसी के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा - चुनावी माहौल में बिना तथ्य-जांच सोशल मीडिया प्रचार से सामाजिक तनाव बढ़ता है, साइबर मॉनिटरिंग और फैक्ट-चेक मजबूत हो
INDIA NEWS REPORT
कुलदीप बरनवाल
वाराणसी, 23 सितंबर 2026 | व्यक्तिगत घटनाओं और स्थानीय आपराधिक मामलों को जातीय, धार्मिक या साम्प्रदायिक रंग दिए जाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की मांग उठी है।
अधिवक्ता एवं भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ, काशी क्षेत्र के संयोजक तथा दी बनारस बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शशांक शेखर त्रिपाठी ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव, गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक को पत्र भेजा है।
पत्र में उन्होंने कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में सामाजिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है। सोशल मीडिया पर कई बार किसी घटना की वास्तविक पृष्ठभूमि की जांच किए बिना ही उसमें शामिल व्यक्तियों की जाति या धर्म के आधार पर उसे प्रचारित किया जाता है, जिससे समाज में अनावश्यक तनाव और अविश्वास की स्थिति बन सकती है।
त्रिपाठी ने मांग की है कि -
1. प्रत्येक संवेदनशील घटना का तथ्यात्मक सत्यापन पुलिस और प्रशासन द्वारा किया जाए।
2. पुराने या एडिटेड वीडियो-फोटो के दुरुपयोग पर कार्रवाई हो।
3. साइबर सेल और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग यूनिट को सक्रिय रखा जाए।
4. आधिकारिक फैक्ट-चेक व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
5. केवल सोशल मीडिया के दावों के आधार पर किसी निर्दोष व्यक्ति या समुदाय को दोषी न ठहराया जाए और कानून सभी पर समान रूप से लागू हो।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल या समुदाय के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि "तथ्य पहले, निष्कर्ष बाद में" की नीति के तहत सामाजिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था को मजबूत करना है।


